By : Ashish Awasthi   |      |    Views : 0005198



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अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले को मध्यस्थता से जरिए सुलझाने का फैसला लिया है। इसके लिए तीन सदस्यीय पैनल बनाया गया है। बता दें कि इससे पहले भी चार बार मध्यस्थता के प्रयास किए गए, लेकिन असफल रहे।

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही है। इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबड़े, डीवाई चंद्रचूड, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई करने के बाद इस मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन कर दिया है। इस पैनल की अध्यक्षता जस्टिस एफएम कलीफुल्लाह करेंगे और इसमें श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू भी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए बने पैनल को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए चार हफ्तों का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की कार्यवाही ऑन-कैमरा आयोजित की जानी चाहिए। मध्यस्थता प्रक्रिया फैजाबाद में आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केस की मीडिया रिपोर्टिंग पर भी रोक लगा दी है। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था। हालांकि निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष मामले की मध्यस्थता के समर्थन में हैं, जबकि हिन्दू पक्ष मध्यस्थता से इनकार कर रहा है।