By : Abhishek Mishra   |   09-01-2019    |    Views : 0005113



आखिर किसे मिलेगा फायदा और कितना


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा दांव चलते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इस फैसले को लेकर चौंकाने वाली बात यह है कि इसे सरकार के साथ खड़े दलित सांसद और नेता तो ठीक बता रहे हैं लेकिन सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाली अन्य पार्टियां इस सैद्धांतिक तौर पर गलत करार दे रही है। उनका कहना है कि यह संवैधानिक तौर पर असंभव है। हालांकि सरकार इस कदम को पूरा करने के लिए संविधान में संशोधन का तरीका अपनाने का प्रयास कर रही है। बता दें कि सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिये जाने के फैसले के बाद आरक्षण कोटा 49.5 फीसदी से बढ़कर 59.5 फीसदी हो जाएगा। 
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक यह दिया जाने वाला 10 फीसदी आरक्षण पहले के 50 फीसदी से अलग होगा। इसकी मांग काफी समय से चली आ रही थी और इससे सवर्ण समाज, ब्राह्मण, बनिया, ईसाई और मुस्लिमों को भी फायदा होगा। जिसको लेकर काफी समय से काम किया जा रहा था। सूत्रों की माने तो पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के लिए सरकार ने कुछ पैमाने भी बनाए हैं। इसके अनुसार आरक्षण के दायरे में सिर्फ वह ही सवर्ण आएंगे जिनकी Gfx(आमदनी आठ लाख से कम हो। कृषि भूमि 5 हेक्टेयर से कम हो, घर हो तो 1000 स्क्वायर फीट से कम हो। वहीं निगम में आवासीय प्लॉट है तो 109 यार्ड से कम की जमीन पर हो। जबकि निगम से बाहर का प्लॉट 209 यार्ड से कम की जमीन का हो। )
बता दें कि सरकार सवर्ण आरक्षण को आर्थिक आधार पर ला रही है जिसकी संविधान में फिलहाल कोई व्यवस्था ही नहीं है। जिसके चलते सरकार को आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा। इन दोनों ही अनुच्छेदों में बदलाव के बाद आर्थिक आधार पर आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा।